गबन - Gaban



जालपा-'अम्मां लेने ही नहीं कहतीं तो लेकर क्या करोगे- क्या मुफ्त में दे रहा है?'


रमानाथ-'समझ लो मुफ्त ही मिलते हैं।'

जालपा-'सुनती हो अम्मांजी, इनकी बातें। आप जाकर लौटा आइए। जब हाथ में रूपये होंगे, तो बहुत गहने मिलेंगे।'

जागेश्वरी ने मोहासक्त स्वर में कहा,'रूपये अभी तो नहीं मांगता?'

जालपा-'उधार भी देगा, तो सूद तो लगा ही लेगा?'

रमानाथ-'तो लौटा दूं- एक बात चटपट तय कर डालो। लेना हो, ले लो, न लेना हो, तो लौटा दो। मोह और दुविधा में न पड़ो…'


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जालपा-'अम्मां लेने ही नहीं कहतीं तो लेकर क्या करोगे- क्या मुफ्त में दे रहा है?'


रमानाथ-'समझ लो मुफ्त ही मिलते हैं।'

जालपा-'सुनती हो अम्मांजी, इनकी बातें। आप जाकर लौटा आइए। जब हाथ में रूपये होंगे, तो बहुत गहने मिलेंगे।'

जागेश्वरी ने मोहासक्त स्वर में कहा,'रूपये अभी तो नहीं मांगता?'

जालपा-'उधार भी देगा, तो सूद तो लगा ही लेगा?'

रमानाथ-'तो लौटा दूं- एक बात चटपट तय कर डालो। लेना हो, ले लो, न लेना हो, तो लौटा दो। मोह और दुविधा में न पड़ो…'


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