कंगन के रूपए दे देंगी। एक क्षण पहले उसने समझा था कि रूपये रमा को देने पड़ेंगे, इसीलिए इच्छा रहने पर भी वह उसे लौटा देना चाहती थी। जब माताजी उसका दाम चुका रही थीं, तो वह क्यों इंकार करती, मगर ऊपरी मन से बोली,' रूपये न हों, तो रहने दीजिए अम्मांजी, अभी कौन जल्दी है?'
रमा ने कुछ चिढ़कर कहा,'तो तुम यह कंगन ले रही हो?'
जालपा-'अम्मांजी नहीं मानतीं, तो मैं क्या करूं?
रमानाथ-'और ये रिंग, इन्हें भी क्यों नहीं रख लेतीं?'
कंगन के रूपए दे देंगी। एक क्षण पहले उसने समझा था कि रूपये रमा को देने पड़ेंगे, इसीलिए इच्छा रहने पर भी वह उसे लौटा देना चाहती थी। जब माताजी उसका दाम चुका रही थीं, तो वह क्यों इंकार करती, मगर ऊपरी मन से बोली,' रूपये न हों, तो रहने दीजिए अम्मांजी, अभी कौन जल्दी है?'
रमा ने कुछ चिढ़कर कहा,'तो तुम यह कंगन ले रही हो?'
जालपा-'अम्मांजी नहीं मानतीं, तो मैं क्या करूं?
रमानाथ-'और ये रिंग, इन्हें भी क्यों नहीं रख लेतीं?'