तो पड़ेगा ही। इतना बडा बोझ वह सिर पर नहीं ले सकता दलाल से बोला, 'बडे दाम हैं भाई, मैंने तो तीन-चार सौ के भीतर ही आंका था।'
दलाल का नाम चरनदास था। बोला,दाम में एक कौड़ी फरक पड़ जाय सरकार, तो मुंह न दिखाऊं। धनीराम की कोठी का तो माल है, आप चलकर पूछ लें। दमड़ी रूपये की दलाली अलबत्ता मेरी है, आपकी मरज़ी हो दीजिए या न दीजिए।'
रमानाथ-'तो भाई इन दामों की चीजें तो इस वक्त हमें नहीं लेनी हैं।'
चरनदास-'ऐसी बात न कहिए, बाबूजी!
तो पड़ेगा ही। इतना बडा बोझ वह सिर पर नहीं ले सकता दलाल से बोला, 'बडे दाम हैं भाई, मैंने तो तीन-चार सौ के भीतर ही आंका था।'
दलाल का नाम चरनदास था। बोला,दाम में एक कौड़ी फरक पड़ जाय सरकार, तो मुंह न दिखाऊं। धनीराम की कोठी का तो माल है, आप चलकर पूछ लें। दमड़ी रूपये की दलाली अलबत्ता मेरी है, आपकी मरज़ी हो दीजिए या न दीजिए।'
रमानाथ-'तो भाई इन दामों की चीजें तो इस वक्त हमें नहीं लेनी हैं।'
चरनदास-'ऐसी बात न कहिए, बाबूजी!