बाजी पलट चुकी थी।दयानाथ ने गर्म होकर कहा--तुम्हें क्या, तुम तो घर में बैठी रहोगी। मौत तो मेरी होगी, जब उधार के लोग नाकभौं सिकोड़ने लगेंगे।
जागेश्वरी--दोगे कहां से, कुछ सोचा है?
दयानाथ--कम-से-कम एक हजार तो वहां मिल ही जाएंगे।
जागेश्वरी--खून मुंह लग गया क्या?
दयानाथ ने शरमाकर कहा--नहीं-नहीं, मगर आखिर वहां भी तो कुछ मिलेगा?
जागेश्वरी--वहां मिलेगा, तो वहां खर्च भी होगा। नाम जोड़े गहने से नहीं होता, दान-दक्षिणा से
बाजी पलट चुकी थी।दयानाथ ने गर्म होकर कहा--तुम्हें क्या, तुम तो घर में बैठी रहोगी। मौत तो मेरी होगी, जब उधार के लोग नाकभौं सिकोड़ने लगेंगे।
जागेश्वरी--दोगे कहां से, कुछ सोचा है?
दयानाथ--कम-से-कम एक हजार तो वहां मिल ही जाएंगे।
जागेश्वरी--खून मुंह लग गया क्या?
दयानाथ ने शरमाकर कहा--नहीं-नहीं, मगर आखिर वहां भी तो कुछ मिलेगा?
जागेश्वरी--वहां मिलेगा, तो वहां खर्च भी होगा। नाम जोड़े गहने से नहीं होता, दान-दक्षिणा से