तो जालपा आईने के सामने खड़ी कानों में रिंग पहन रही थी। उसे देखते ही बोली -'आज किसी अच्छे का मुंह देखकर उठी थी। दो चीज़ें मुफ्त हाथ आ गई।'
रमा ने विस्मय से पूछा , 'मुफ्त क्यों? रूपये न देने पड़ेंगे? '
जालपा-'रूपये तो अम्मांजी देंगी? '
रमानाथ-'क्या कुछ कहती थीं? '
जालपा-'उन्होंने मुझे भेंट दिए हैं, तो रूपये कौन देगा? '
रमा ने उसके भोलेपन पर मुस्कराकर कहा, यही समझकर तुमने यह चीज़ें ले लीं ? अम्मां को देना होता
तो जालपा आईने के सामने खड़ी कानों में रिंग पहन रही थी। उसे देखते ही बोली -'आज किसी अच्छे का मुंह देखकर उठी थी। दो चीज़ें मुफ्त हाथ आ गई।'
रमा ने विस्मय से पूछा , 'मुफ्त क्यों? रूपये न देने पड़ेंगे? '
जालपा-'रूपये तो अम्मांजी देंगी? '
रमानाथ-'क्या कुछ कहती थीं? '
जालपा-'उन्होंने मुझे भेंट दिए हैं, तो रूपये कौन देगा? '
रमा ने उसके भोलेपन पर मुस्कराकर कहा, यही समझकर तुमने यह चीज़ें ले लीं ? अम्मां को देना होता