गबन - Gaban



जालपा ने मुस्कराकर कहा,'कहीं बाबूजी देख लें तो?'

रमानाथ-'तो क्या, कुछ नहीं।'

जालपा-'मैं तो मारे शर्म के गड़ जाऊं।'

रमानाथ-अभी तो मुझे भी शर्म आएगी, मगर बाबूजी ख़ुद ही इधर न आएंगे।'

जालपा-'और जो कहीं अम्मांजी देख लें!'

रमानाथ-'अम्मां से कौन डरता है, दो दलीलों में ठीक कर दूंगा।'

दस ही पांच दिन में जालपा ने नए महिला-समाज में अपना रंग जमा लिया। उसने इस समाज में इस तरह प्रवेश किया, जैसे कोई कुशल वक्ता पहली बार


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जालपा ने मुस्कराकर कहा,'कहीं बाबूजी देख लें तो?'

रमानाथ-'तो क्या, कुछ नहीं।'

जालपा-'मैं तो मारे शर्म के गड़ जाऊं।'

रमानाथ-अभी तो मुझे भी शर्म आएगी, मगर बाबूजी ख़ुद ही इधर न आएंगे।'

जालपा-'और जो कहीं अम्मांजी देख लें!'

रमानाथ-'अम्मां से कौन डरता है, दो दलीलों में ठीक कर दूंगा।'

दस ही पांच दिन में जालपा ने नए महिला-समाज में अपना रंग जमा लिया। उसने इस समाज में इस तरह प्रवेश किया, जैसे कोई कुशल वक्ता पहली बार


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