जालपा-'क्या करती- इंकार करते भी तो न बनता था! '
रमानाथ-'तो सबेरे तुम्हारे लिए एक अच्छी-सी साड़ी ला दूं? '
जालपा-'क्या मेरे पास साड़ी नहीं है, ज़रा देर के लिए पचास-साठ रूपये खर्च करने से फायदा! '
रमानाथ-'तुम्हारे पास अच्छी साड़ी कहां है। इसकी साड़ी तुमने देखी?ऐसी ही तुम्हारे लिए भी लाऊंगा।'
जालपा ने विवशता के भाव से कहा,मुझे साफ कह देना चाहिए था कि फुरसत नहीं है।'
रमानाथ-'फिर इनकी दावत भी तो करनी पडेगी।'
जालपा-'यह तो बुरी विपत्ति गले पड़ी।'
जालपा-'क्या करती- इंकार करते भी तो न बनता था! '
रमानाथ-'तो सबेरे तुम्हारे लिए एक अच्छी-सी साड़ी ला दूं? '
जालपा-'क्या मेरे पास साड़ी नहीं है, ज़रा देर के लिए पचास-साठ रूपये खर्च करने से फायदा! '
रमानाथ-'तुम्हारे पास अच्छी साड़ी कहां है। इसकी साड़ी तुमने देखी?ऐसी ही तुम्हारे लिए भी लाऊंगा।'
जालपा ने विवशता के भाव से कहा,मुझे साफ कह देना चाहिए था कि फुरसत नहीं है।'
रमानाथ-'फिर इनकी दावत भी तो करनी पडेगी।'
जालपा-'यह तो बुरी विपत्ति गले पड़ी।'