जालपा-'अच्छा, अब मैं एक प्रश्न करती हूं। संभले रहना। तुम मुझसे क्यों प्रेम करते हो! तुम्हें मेरी कसम है, सच बताना।'
रमानाथ-'यह तो तुमने बेढब प्रश्न किया। अगर मैं तुमसे यही प्रश्न पूछूं तो तुम मुझे क्या जवाब दोगी? '
जालपा-'मैं तो जानती हूं।'
रमानाथ-'बताओ।'
जालपा-'तुम बतला दो, मैं भी बतला दूं।'
रमानाथ-'मैं तो जानता ही नहीं। केवल इतना ही जानता हूं कि तुम मेरे रोम-रोम में रम रही हो।'
जालपा-'सोचकर बतलाओ। मैं आदर्श-पत्नी नहीं हूं,
जालपा-'अच्छा, अब मैं एक प्रश्न करती हूं। संभले रहना। तुम मुझसे क्यों प्रेम करते हो! तुम्हें मेरी कसम है, सच बताना।'
रमानाथ-'यह तो तुमने बेढब प्रश्न किया। अगर मैं तुमसे यही प्रश्न पूछूं तो तुम मुझे क्या जवाब दोगी? '
जालपा-'मैं तो जानती हूं।'
रमानाथ-'बताओ।'
जालपा-'तुम बतला दो, मैं भी बतला दूं।'
रमानाथ-'मैं तो जानता ही नहीं। केवल इतना ही जानता हूं कि तुम मेरे रोम-रोम में रम रही हो।'
जालपा-'सोचकर बतलाओ। मैं आदर्श-पत्नी नहीं हूं,