गबन - Gaban



जालपा-'कितने बाकी होंगे, कुछ हिसाब-किताब लिखते हो? '

रमानाथ-'हां, लिखता क्यों नहीं। सात सौ से कुछ कम ही होंगे।'

जालपा-'तब तो पूरी गठरी है, तुमने कहीं रतन के रूपये तो नहीं दे दिए? '

रमा दिल में कांप रहा था, कहीं जालपा यह प्रश्न न कर बैठे। आख़िर उसने यह प्रश्न पूछ ही लिया। उस वक्त भी यदि रमा ने साहस करके सच्ची बात स्वीकार कर ली होती तो शायद उसके संकटों का अंत हो जाता। जालपा एक मिनट तक अवश्य सन्नाटे में आ जाती। संभव है,


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जालपा-'कितने बाकी होंगे, कुछ हिसाब-किताब लिखते हो? '

रमानाथ-'हां, लिखता क्यों नहीं। सात सौ से कुछ कम ही होंगे।'

जालपा-'तब तो पूरी गठरी है, तुमने कहीं रतन के रूपये तो नहीं दे दिए? '

रमा दिल में कांप रहा था, कहीं जालपा यह प्रश्न न कर बैठे। आख़िर उसने यह प्रश्न पूछ ही लिया। उस वक्त भी यदि रमा ने साहस करके सच्ची बात स्वीकार कर ली होती तो शायद उसके संकटों का अंत हो जाता। जालपा एक मिनट तक अवश्य सन्नाटे में आ जाती। संभव है,


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