गबन - Gaban



रमा ने सावधन होकर कहा, 'उसने रूपये मांगे तो न थे?'

जालपा-'मांगे क्यों नहीं। हां, जब मैंने दे दिए तो अलबत्ता कहने लगी, इसे क्यों लौटाती हो, अपने पास ही पडारहने दो। मैंने कह दिया, ऐसे शक्की मिज़ाज वालों का रूपया मैं नहीं रखती।'

रमानाथ-'ईश्वर के लिए तुम मुझसे बिना पूछे ऐसे काम मत किया करो।'

जालपा-'तो अभी क्या हुआ, उसके पास जाकर रूपये मांग लाओ, मगर अभी से रूपये घर में लाकर अपने जी का जंजाल क्यों मोल लोगे।'

रमा


366 of 1203



रमा ने सावधन होकर कहा, 'उसने रूपये मांगे तो न थे?'

जालपा-'मांगे क्यों नहीं। हां, जब मैंने दे दिए तो अलबत्ता कहने लगी, इसे क्यों लौटाती हो, अपने पास ही पडारहने दो। मैंने कह दिया, ऐसे शक्की मिज़ाज वालों का रूपया मैं नहीं रखती।'

रमानाथ-'ईश्वर के लिए तुम मुझसे बिना पूछे ऐसे काम मत किया करो।'

जालपा-'तो अभी क्या हुआ, उसके पास जाकर रूपये मांग लाओ, मगर अभी से रूपये घर में लाकर अपने जी का जंजाल क्यों मोल लोगे।'

रमा


366 of 1203