गबन - Gaban



रमा ने झिझकते हुए कहा, 'हां, इधर तो वर्षो से नहीं बैठा।'

रतन-'तो आप इन बच्चों को संभालकर बैठिए, मैं आपको झुलाऊंगी।'

अगर उस डाल से न छू ले तो कहिएगा! रमा के प्राण सूख गए। बोला,आजतो बहुत देर हो गई है, फिर कभी आऊंगा। '

रतन-'अजी अभी क्या देर हो गई है, दस भी नहीं बजे, घबडाइए नहीं, अभी बहुत रात पड़ी है। खूब झूलकर जाइएगा। कल जालपा को लाइएगा, हम दोनों झूलेंगे।'

रमा झूले पर से उतर आया तो उसका चेहरा सहमा हुआ था। मालूम होता था,


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रमा ने झिझकते हुए कहा, 'हां, इधर तो वर्षो से नहीं बैठा।'

रतन-'तो आप इन बच्चों को संभालकर बैठिए, मैं आपको झुलाऊंगी।'

अगर उस डाल से न छू ले तो कहिएगा! रमा के प्राण सूख गए। बोला,आजतो बहुत देर हो गई है, फिर कभी आऊंगा। '

रतन-'अजी अभी क्या देर हो गई है, दस भी नहीं बजे, घबडाइए नहीं, अभी बहुत रात पड़ी है। खूब झूलकर जाइएगा। कल जालपा को लाइएगा, हम दोनों झूलेंगे।'

रमा झूले पर से उतर आया तो उसका चेहरा सहमा हुआ था। मालूम होता था,


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