गबन - Gaban

चला। चौक में एक-दो चीज़ें लेनी थीं। उधार से होता हुआ घर पहुंचा तो नोट गायब थे। रमेश बाबू ने आंखें गाड़कर कहा, 'तीन सौ के नोट गायब हो गए?'

रमानाथ-'जी हां, कोट के ऊपर की जेब में थे। किसी ने निकाल लिए?'

रमेश-'और तुमको मारकर थैली नहीं छीन ली?'

रमानाथ-'क्या बताऊं बाबूजी, तब से चित्त की जो दशा हो रही है, वह बयान नहीं कर सकता तब से अब तक इसी फिक्र में दौड़ रहा हूं। कोई बंदोबस्त न हो सका।'

रमेश-'अपने पिता से तो कहा ही न होगा? '


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चला। चौक में एक-दो चीज़ें लेनी थीं। उधार से होता हुआ घर पहुंचा तो नोट गायब थे। रमेश बाबू ने आंखें गाड़कर कहा, 'तीन सौ के नोट गायब हो गए?'

रमानाथ-'जी हां, कोट के ऊपर की जेब में थे। किसी ने निकाल लिए?'

रमेश-'और तुमको मारकर थैली नहीं छीन ली?'

रमानाथ-'क्या बताऊं बाबूजी, तब से चित्त की जो दशा हो रही है, वह बयान नहीं कर सकता तब से अब तक इसी फिक्र में दौड़ रहा हूं। कोई बंदोबस्त न हो सका।'

रमेश-'अपने पिता से तो कहा ही न होगा? '


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