मगर इतना कहे देता हूं कि ऐसा माल फिर न पाइएगा।'
रमानाथ-'रूपये होंगे तो माल बहुत मिल जायगा। '
जौहरी-'कभी-कभी दाम रहने पर भी अच्छा माल नहीं मिलता।'यह कहकर जौहरी ने फिर हार को केस में रक्खा और इस तरह संदूक समेटने लगा, मानो वह एक क्षण भी न रूकेगा।
रतन का रोयां-रोयां कान बना हुआ था, मानो कोई कैदी अपनी किस्मत का फैसला सुनने को खडा हो उसके ह्रदय की सारी ममता, ममता का सारा अनुराग, अनुराग की सारी अधीरता, उत्कंठा और चेष्टा उसी हार पर केंद्रित हो रही थी,
मगर इतना कहे देता हूं कि ऐसा माल फिर न पाइएगा।'
रमानाथ-'रूपये होंगे तो माल बहुत मिल जायगा। '
जौहरी-'कभी-कभी दाम रहने पर भी अच्छा माल नहीं मिलता।'यह कहकर जौहरी ने फिर हार को केस में रक्खा और इस तरह संदूक समेटने लगा, मानो वह एक क्षण भी न रूकेगा।
रतन का रोयां-रोयां कान बना हुआ था, मानो कोई कैदी अपनी किस्मत का फैसला सुनने को खडा हो उसके ह्रदय की सारी ममता, ममता का सारा अनुराग, अनुराग की सारी अधीरता, उत्कंठा और चेष्टा उसी हार पर केंद्रित हो रही थी,