'मांगती जो जी में आता, तुम्हें क्या बता दूं?'
'नहीं, बताओ, शायद तुम बहुत-सा धन मांगतीं।'
'धन को तुम बहुत बडी चीज़ समझते होगे? मैं तो कुछ नहीं समझती।'
'हां, मैं तो समझता हूं। निर्धान रहकर जीना मरने से भी बदतर है। मैं अगर किसी देवता को पकड़ पाऊं तो बिना काफी रूपये लिये न मानूंब मैं सोने की दीवार नहीं खड़ी करना चाहता, न राकट्ठलर और कारनेगी बनने की मेरी इच्छा है। मैं केवल इतना धन चाहता हूं कि जरूरत की मामूली चीज़ों
'मांगती जो जी में आता, तुम्हें क्या बता दूं?'
'नहीं, बताओ, शायद तुम बहुत-सा धन मांगतीं।'
'धन को तुम बहुत बडी चीज़ समझते होगे? मैं तो कुछ नहीं समझती।'
'हां, मैं तो समझता हूं। निर्धान रहकर जीना मरने से भी बदतर है। मैं अगर किसी देवता को पकड़ पाऊं तो बिना काफी रूपये लिये न मानूंब मैं सोने की दीवार नहीं खड़ी करना चाहता, न राकट्ठलर और कारनेगी बनने की मेरी इच्छा है। मैं केवल इतना धन चाहता हूं कि जरूरत की मामूली चीज़ों