गबन - Gaban

मिलेगा- मैं डरता हूं कि कहीं आज भी तुम यों ही ख़ाली हाथ न चले जाओ, नहीं तो ग़जब ही हो जाय! '

रमानाथ-'जब उनसे मांगने का निश्चय कर लिया, तो अब क्या चिंता! '

रमेश-'आज मौका मिले, तो ज़रा रतन के पास चले जाना। उस दिन मैंने कितना जोर देकर कहा था, लेकिन मालूम होता है तुम भूल गए।'

रमानाथ-'भूल तो नहीं गया, लेकिन उनसे कहते शर्म आती है।'

रमेश-'अपने बाप से कहते भी शर्म आती है? अगर अपने लोगों में यह संकोच न होता, तो आज हमारी यह दशा क्यों होती?'


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मिलेगा- मैं डरता हूं कि कहीं आज भी तुम यों ही ख़ाली हाथ न चले जाओ, नहीं तो ग़जब ही हो जाय! '

रमानाथ-'जब उनसे मांगने का निश्चय कर लिया, तो अब क्या चिंता! '

रमेश-'आज मौका मिले, तो ज़रा रतन के पास चले जाना। उस दिन मैंने कितना जोर देकर कहा था, लेकिन मालूम होता है तुम भूल गए।'

रमानाथ-'भूल तो नहीं गया, लेकिन उनसे कहते शर्म आती है।'

रमेश-'अपने बाप से कहते भी शर्म आती है? अगर अपने लोगों में यह संकोच न होता, तो आज हमारी यह दशा क्यों होती?'


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