गबन - Gaban

तो घर सूना-सूना लगता है। मैं अभी

सोच रही थी, मुझे मैके जाना पड़े, तो मैं जाऊं या न जाऊं? मेरा जी तो वहां बिलकुल न लगे।

रमानाथ-'तुम तो कहीं जाने को तैयार बैठी हो ।'

जालपा-'सेठानीजी ने बुला भेजा है, दोपहर तक चली आऊंगी।'

रमा की दशा इस समय उस शिकारी की-सी थी, जो हिरनी को अपने शावकों के साथ किलोल करते देखकर तनी हुई बंदूक कंधो पर रख लेता है,और वह वात्सल्य और प्रेम की क्रीडादेखने में तल्लीन हो जाता है। उसे अपनी ओर टकटकी लगाए देखकर जालपा ने मुस्कराकर कहा, 'देखो,


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तो घर सूना-सूना लगता है। मैं अभी

सोच रही थी, मुझे मैके जाना पड़े, तो मैं जाऊं या न जाऊं? मेरा जी तो वहां बिलकुल न लगे।

रमानाथ-'तुम तो कहीं जाने को तैयार बैठी हो ।'

जालपा-'सेठानीजी ने बुला भेजा है, दोपहर तक चली आऊंगी।'

रमा की दशा इस समय उस शिकारी की-सी थी, जो हिरनी को अपने शावकों के साथ किलोल करते देखकर तनी हुई बंदूक कंधो पर रख लेता है,और वह वात्सल्य और प्रेम की क्रीडादेखने में तल्लीन हो जाता है। उसे अपनी ओर टकटकी लगाए देखकर जालपा ने मुस्कराकर कहा, 'देखो,


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