गबन - Gaban

तो वह उसका उम्रभर के लिए गुलाम हो जाता।

दयानाथ ने पूछा--कोई बात सूझी?मुझे तो कुछ नहीं सूझता।

कोई उपाय सोचना ही पड़ेगा।आप ही सोचिए, मुझे तो कुछ नहीं सूझता।

क्यों नहीं उससे दो-तीन गहने मांग लेते?तुम चाहो तो ले सकते हो,

हमारे लिए मुश्किल है।

मुझे शर्म आती है।

तुम विचित्र आदमी हो, न खुद मांगोगे न मुझे मांगने दोगे, तो आखिर यह नाव कैसे चलेगी? मैं एक बार नहीं, हजार बार कह चुका कि मुझसे कोई आशा मत रक्खो। मैं अपने


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तो वह उसका उम्रभर के लिए गुलाम हो जाता।

दयानाथ ने पूछा--कोई बात सूझी?मुझे तो कुछ नहीं सूझता।

कोई उपाय सोचना ही पड़ेगा।आप ही सोचिए, मुझे तो कुछ नहीं सूझता।

क्यों नहीं उससे दो-तीन गहने मांग लेते?तुम चाहो तो ले सकते हो,

हमारे लिए मुश्किल है।

मुझे शर्म आती है।

तुम विचित्र आदमी हो, न खुद मांगोगे न मुझे मांगने दोगे, तो आखिर यह नाव कैसे चलेगी? मैं एक बार नहीं, हजार बार कह चुका कि मुझसे कोई आशा मत रक्खो। मैं अपने


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