बेचारी रूआंसी हो गई। याद है? '
रमा ने मानो नदी में डूबते हुए कहा--मुझे तो याद नहीं आता।'
जालपा--अच्छा, अबकी चलोगे तो दिखा दूंगी। आज तुम बाज़ार की तरफ गए थे कि नहीं?'
रमा ने सिर झुकाकर कहा--आज तो फुरसत नहीं मिली।'
जालपा--जाओ, मैं तुमसे न बोलूंगी! रोज हीले-हवाले करते हो अच्छा, कल ला दोगे न?'
रमानाथ का कलेजा मसोस उठा। यह चन्द्रहार के लिए इतनी विकल हो रही है। इसे क्या मालूम कि दुर्भाग्य इसका सर्वस्व लूटने का सामान
बेचारी रूआंसी हो गई। याद है? '
रमा ने मानो नदी में डूबते हुए कहा--मुझे तो याद नहीं आता।'
जालपा--अच्छा, अबकी चलोगे तो दिखा दूंगी। आज तुम बाज़ार की तरफ गए थे कि नहीं?'
रमा ने सिर झुकाकर कहा--आज तो फुरसत नहीं मिली।'
जालपा--जाओ, मैं तुमसे न बोलूंगी! रोज हीले-हवाले करते हो अच्छा, कल ला दोगे न?'
रमानाथ का कलेजा मसोस उठा। यह चन्द्रहार के लिए इतनी विकल हो रही है। इसे क्या मालूम कि दुर्भाग्य इसका सर्वस्व लूटने का सामान