वह एक क्षण खडा मुग्ध नजरों से जालपा के निद्रा-विहसित मुख की ओर देखता रहा। कमरे में जाने का साहस न हुआ। फिर लेट गया।
जालपा ने चौंककर पूछा--कहां जाते हो, क्या सवेरा हो गया?
रमानाथ--अभी तो बडी रात है।
जालपा--तो तुम बैठे क्यों हो?
रमानाथ--कुछ नहीं, ज़रा पानी पीने उठा था।
जालपा ने प्रेमातुर होकर रमा के गले में बांहें डाल दीं और उसे सुलाकर कहा--तुम इस तरह मुझ पर टोना करोगे, तो मैं भाग जाऊंगी। न जाने किस तरहताकते हो,
वह एक क्षण खडा मुग्ध नजरों से जालपा के निद्रा-विहसित मुख की ओर देखता रहा। कमरे में जाने का साहस न हुआ। फिर लेट गया।
जालपा ने चौंककर पूछा--कहां जाते हो, क्या सवेरा हो गया?
रमानाथ--अभी तो बडी रात है।
जालपा--तो तुम बैठे क्यों हो?
रमानाथ--कुछ नहीं, ज़रा पानी पीने उठा था।
जालपा ने प्रेमातुर होकर रमा के गले में बांहें डाल दीं और उसे सुलाकर कहा--तुम इस तरह मुझ पर टोना करोगे, तो मैं भाग जाऊंगी। न जाने किस तरहताकते हो,