पूछा--इसे क्यों उठा लाए?
रमा ने धृष्टता से कहा--आप ही का तो हुक्म था।
दयानाथ--झूठ कहते हो!
रमानाथ--तो क्या फिर रख आऊं?
रमा के इस प्रश्न ने दयानाथ को घोर संकट में डाल दिया। झेंपते हुए बोले--अब क्या रख आओगे, कहीं देख ले, तो गजब ही हो जाए। वही काम करोगे, जिसमें जग-हंसाई हो खड़े क्या हो, संदूकची मेरे बडे संदूक में रख आओ और जाकर लेट रहो कहीं जाग पड़े तो बस! बरामदे के पीछे दयानाथ का कमरा था। उसमें एक देवदार का पुराना
पूछा--इसे क्यों उठा लाए?
रमा ने धृष्टता से कहा--आप ही का तो हुक्म था।
दयानाथ--झूठ कहते हो!
रमानाथ--तो क्या फिर रख आऊं?
रमा के इस प्रश्न ने दयानाथ को घोर संकट में डाल दिया। झेंपते हुए बोले--अब क्या रख आओगे, कहीं देख ले, तो गजब ही हो जाए। वही काम करोगे, जिसमें जग-हंसाई हो खड़े क्या हो, संदूकची मेरे बडे संदूक में रख आओ और जाकर लेट रहो कहीं जाग पड़े तो बस! बरामदे के पीछे दयानाथ का कमरा था। उसमें एक देवदार का पुराना