अलंकार - Alankar

नाटक देखने वाले पुरुष अपनी जगहों से दूसरों को हंसहंस पुकारते थे।

पापनाशी मन में ईश्वर की परार्थना कर रहा था और मुंह से एक भी मिथ्या शब्द नहीं निकलता था, लेकिन उसका साथी नाट्यकाल की अवनति की चचार करने लगा-'भाई, हमारी इस कला का घोर पतन हो गया है। पराचीन समय में अभिनेता चेहरे पहनकर कवियों की रचनाएं उच्च स्वर से गाया करते थे। अब तो वह गूंगों की भांति अभिनय करते हैं। वह पुराने सामान भी गायब हो गये। न तो वह चेहरे रहे जिनमें


125 of 707

नाटक देखने वाले पुरुष अपनी जगहों से दूसरों को हंसहंस पुकारते थे।

पापनाशी मन में ईश्वर की परार्थना कर रहा था और मुंह से एक भी मिथ्या शब्द नहीं निकलता था, लेकिन उसका साथी नाट्यकाल की अवनति की चचार करने लगा-'भाई, हमारी इस कला का घोर पतन हो गया है। पराचीन समय में अभिनेता चेहरे पहनकर कवियों की रचनाएं उच्च स्वर से गाया करते थे। अब तो वह गूंगों की भांति अभिनय करते हैं। वह पुराने सामान भी गायब हो गये। न तो वह चेहरे रहे जिनमें


125 of 707