से परकट हो रहा है कि संसार शीघर ही मूर्खता और बर्बरता के अन्धकार में मग्न हुआ चाहता है। कोटा, हमें अपने जीवन में इन्हीं आंखों से बड़ीबड़ी भयंकर दुर्घटनाएं देखनी पड़ी हैं। विद्या, बुद्धि और सदाचरण से जितनी मानसिक सान्त्वनाएं उपलब्ध हो सकती हैं, उनमें अब जो शेष रह गया वह यही है कि अधःपतन का शोक दृश्य देखें।'
कोटा-'मित्रवर, यह सत्य है कि जनता की स्वार्थपरता और असभ्य म्लेच्छों की दद्दण्डता, नितान्त भयंकर सम्भावनाएं हैं,
से परकट हो रहा है कि संसार शीघर ही मूर्खता और बर्बरता के अन्धकार में मग्न हुआ चाहता है। कोटा, हमें अपने जीवन में इन्हीं आंखों से बड़ीबड़ी भयंकर दुर्घटनाएं देखनी पड़ी हैं। विद्या, बुद्धि और सदाचरण से जितनी मानसिक सान्त्वनाएं उपलब्ध हो सकती हैं, उनमें अब जो शेष रह गया वह यही है कि अधःपतन का शोक दृश्य देखें।'
कोटा-'मित्रवर, यह सत्य है कि जनता की स्वार्थपरता और असभ्य म्लेच्छों की दद्दण्डता, नितान्त भयंकर सम्भावनाएं हैं,