घृणा करते। हम उनके गुणअवगुण की परख निरपेक्ष भाव से कर सकते हैं, क्योंकि हम उनसे उतने ही ऊंचे हैं जिसने देवतागण हमसे। मनुष्य के लिए, जो वस्तुओं का एक ही भाग देख सकता है, बुराई बुराई है। ईश्वर की आंखों में, जो सर्वज्ञ है; बुराई भलाई है। निस्सन्देह ही करूपता कुरूप होती है, सुन्दर नहीं होती, किन्तु यदि सभी वस्तुएं सुन्दर हो जाएं तो सुन्दरता का लोप हो जायेगा। इसलिए परमावश्यक है कि बुराई का नाश न हो; नहीं तो संसार रहने के योग्य न रह जायेगा।'
घृणा करते। हम उनके गुणअवगुण की परख निरपेक्ष भाव से कर सकते हैं, क्योंकि हम उनसे उतने ही ऊंचे हैं जिसने देवतागण हमसे। मनुष्य के लिए, जो वस्तुओं का एक ही भाग देख सकता है, बुराई बुराई है। ईश्वर की आंखों में, जो सर्वज्ञ है; बुराई भलाई है। निस्सन्देह ही करूपता कुरूप होती है, सुन्दर नहीं होती, किन्तु यदि सभी वस्तुएं सुन्दर हो जाएं तो सुन्दरता का लोप हो जायेगा। इसलिए परमावश्यक है कि बुराई का नाश न हो; नहीं तो संसार रहने के योग्य न रह जायेगा।'