अलंकार - Alankar

और अब वह देवताओं के तुल्य हैं जिन्हें कोई इच्छा नहीं होती।'

कोटा ने सिर पीट लिया और बोला-'मरने की इतनी जल्दी ! अभी तो वह बहुत दिनों तक सामराज्य की सेवा कर सकते थे। कैसी विडम्बना है !'

पापनाशी और थायस पासपास स्तम्भित और अवाक्य बैठे रहे। उनके अन्तःकरण घृणा, भय और आशा से आच्छादित हो रहे थे।

सहसा पापनाशी ने थायस का हाथ पकड़ लिया और शराबियों को फांदते हुए, जो विषयभोगियों के पास ही पड़े हुए थे, और उस मदिरा और रक्त को पैरों से कुचलते हुए जो फर्श पर बहा हुआ था,


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और अब वह देवताओं के तुल्य हैं जिन्हें कोई इच्छा नहीं होती।'

कोटा ने सिर पीट लिया और बोला-'मरने की इतनी जल्दी ! अभी तो वह बहुत दिनों तक सामराज्य की सेवा कर सकते थे। कैसी विडम्बना है !'

पापनाशी और थायस पासपास स्तम्भित और अवाक्य बैठे रहे। उनके अन्तःकरण घृणा, भय और आशा से आच्छादित हो रहे थे।

सहसा पापनाशी ने थायस का हाथ पकड़ लिया और शराबियों को फांदते हुए, जो विषयभोगियों के पास ही पड़े हुए थे, और उस मदिरा और रक्त को पैरों से कुचलते हुए जो फर्श पर बहा हुआ था,


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