अलंकार - Alankar

दाहिनी ओर एक नग्न स्त्री की मूर्ति को ध्यान से देखा है ? एक दिन मैंने आंखों से देखा कि उस मूर्ति ने जीवित पराणी के समान अपना सिर फेर लिया और फिर एक पल में अपनी पूर्व दशा में आ गयी, मैं भयभीत हो गयी। जब मैंने निसियास से यह अद्भुत लीला बयान की तो वह मेरी हंसी उड़ाने लगा। लेकिन उस मूर्ति में कोई जादू अवश्य है; क्योंकि उसने एक विदेशी मनुष्य को, जिस पर मेरे सौन्दर्य का जादू कुछ असर न कर सका था, अत्यन्त परबल इच्छाओं से परिपूरित


407 of 707

दाहिनी ओर एक नग्न स्त्री की मूर्ति को ध्यान से देखा है ? एक दिन मैंने आंखों से देखा कि उस मूर्ति ने जीवित पराणी के समान अपना सिर फेर लिया और फिर एक पल में अपनी पूर्व दशा में आ गयी, मैं भयभीत हो गयी। जब मैंने निसियास से यह अद्भुत लीला बयान की तो वह मेरी हंसी उड़ाने लगा। लेकिन उस मूर्ति में कोई जादू अवश्य है; क्योंकि उसने एक विदेशी मनुष्य को, जिस पर मेरे सौन्दर्य का जादू कुछ असर न कर सका था, अत्यन्त परबल इच्छाओं से परिपूरित


407 of 707