और लोगों ने उन्हें मुझे उपहार देने के लिए अतुल धन व्यय किया था। मेरे पास अमूल्य प्याले, मूर्तियां और चित्र हैं। मेरे विचार में उनको जलाना भी अनुचित होगा। लेकिन मैं इस विषय में कोई आगरह नहीं करती। पूज्य पिता, आपकी जैसी इच्छा हो कीजिए।'
यह कहकर वह पापनाशी के पीछेपीछे अपने गृहद्वार पर पहुंची जिस पर अगणित मनुष्यों के हाथों से हारों और पुष्पमालाओं की भेंट पा चुकी थी, और जब द्वार खुला तो उसने द्वारपाल से कहा कि घर के समस्त
और लोगों ने उन्हें मुझे उपहार देने के लिए अतुल धन व्यय किया था। मेरे पास अमूल्य प्याले, मूर्तियां और चित्र हैं। मेरे विचार में उनको जलाना भी अनुचित होगा। लेकिन मैं इस विषय में कोई आगरह नहीं करती। पूज्य पिता, आपकी जैसी इच्छा हो कीजिए।'
यह कहकर वह पापनाशी के पीछेपीछे अपने गृहद्वार पर पहुंची जिस पर अगणित मनुष्यों के हाथों से हारों और पुष्पमालाओं की भेंट पा चुकी थी, और जब द्वार खुला तो उसने द्वारपाल से कहा कि घर के समस्त