की ओर कातर नेत्रों से ताकते हुए मूर्तिवत खड़े रह गये। वह अभी इसी अकर्मण्य दशा में अवाक और निश्चल खड़े थे, और एकदूसरे को कुहनियां गड़ाते थे, मानो वह इस हुक्म को दिल्लगी समझ रहे हैं कि पापनाशी ने रौद्ररूप धारण करके कहा-'क्यों बिलम्ब हो रहा है ?'
इसी समय थायस नंगे पैर, छिटके हुए केश कन्धों पर लहराती घर में से निकली। वह भद्दे मोटे वस्त्र धारण किये हुए थी, जो उसके देहस्पर्श मात्र से स्वगीर्य, कामोत्तेजक सुगन्धि से परिपूरित
की ओर कातर नेत्रों से ताकते हुए मूर्तिवत खड़े रह गये। वह अभी इसी अकर्मण्य दशा में अवाक और निश्चल खड़े थे, और एकदूसरे को कुहनियां गड़ाते थे, मानो वह इस हुक्म को दिल्लगी समझ रहे हैं कि पापनाशी ने रौद्ररूप धारण करके कहा-'क्यों बिलम्ब हो रहा है ?'
इसी समय थायस नंगे पैर, छिटके हुए केश कन्धों पर लहराती घर में से निकली। वह भद्दे मोटे वस्त्र धारण किये हुए थी, जो उसके देहस्पर्श मात्र से स्वगीर्य, कामोत्तेजक सुगन्धि से परिपूरित