ने इसकी परेरणा न की थी। मैं समझ गया कि ईश्वर को कभी मंजूर न होगा कि तेरे पाप की कमाई ईसू के पिरय भक्तों को दी जाये। इससे उनकी आत्मा को घोर दुःख होगा। जो स्वयं दरिद्र रहना चाहते हैं, स्वयं कष्ट भोगना चाहते हैं, इसलिए कि इससे उनकी आत्मा शुद्ध होगी, उन्हें यह कलुषित धन देकर उनकी आत्मशुद्धि के परत्यन को विफल करना उनके साथ बड़ा अन्याय होगा। इसलिए मैं निश्चय कर चुका हूं कि तेरा सर्वस्व अग्नि का भोजन बन जाये, एक धागा भी बाकी
ने इसकी परेरणा न की थी। मैं समझ गया कि ईश्वर को कभी मंजूर न होगा कि तेरे पाप की कमाई ईसू के पिरय भक्तों को दी जाये। इससे उनकी आत्मा को घोर दुःख होगा। जो स्वयं दरिद्र रहना चाहते हैं, स्वयं कष्ट भोगना चाहते हैं, इसलिए कि इससे उनकी आत्मा शुद्ध होगी, उन्हें यह कलुषित धन देकर उनकी आत्मशुद्धि के परत्यन को विफल करना उनके साथ बड़ा अन्याय होगा। इसलिए मैं निश्चय कर चुका हूं कि तेरा सर्वस्व अग्नि का भोजन बन जाये, एक धागा भी बाकी