अलंकार - Alankar

है कि उनके उद्घार के साधन उनके अपकार के यन्त्र बन जाते हैं। अतएव जिन्हें सद्ज्ञान पराप्त है। उन्हें बड़ी चतुराई से उसका परचार करना चाहिए। उसने टिमाक्लीज को नमस्कार किया और एक लम्बी सांस खींचकर रात ही को फिर यात्रा पर चल पड़ा।

सूयोर्दय हुआ तो उसने जलपक्षियों को नदी के किनारे एक पैर पर खड़े देखा। उनकी पीली और गुलाबी गर्दनों को परतिबिम्ब जल में दिखाई देता था। कोमल बेत वृक्ष अपनी हरीहरी पत्तियों को जल पर फैलाए हुए थे।


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है कि उनके उद्घार के साधन उनके अपकार के यन्त्र बन जाते हैं। अतएव जिन्हें सद्ज्ञान पराप्त है। उन्हें बड़ी चतुराई से उसका परचार करना चाहिए। उसने टिमाक्लीज को नमस्कार किया और एक लम्बी सांस खींचकर रात ही को फिर यात्रा पर चल पड़ा।

सूयोर्दय हुआ तो उसने जलपक्षियों को नदी के किनारे एक पैर पर खड़े देखा। उनकी पीली और गुलाबी गर्दनों को परतिबिम्ब जल में दिखाई देता था। कोमल बेत वृक्ष अपनी हरीहरी पत्तियों को जल पर फैलाए हुए थे।


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