अलंकार - Alankar

निकल रही थी। बाईं ओर मरुस्थल तक हरेभरे खेतों और वृक्षपुंजों की शोभा आंखों को मुग्ध कर देती थी। पके हुए गेहूं के खेतों पर सूर्य की किरणें चमक रही थीं और भूमि से भीनीभीनी सुगन्ध के झोके आते थे। यह परकृतिशोभा देखकर पापनाशी ने घुटनों पर गिरकर ईश्वर की वन्दना की-'भगवान्, मेरी यात्रा समाप्त हुई। तुझे धन्यवाद देता हूं। दयानिधि, जिस परकार तूने इन अंजीर के पौधों पर ओस की बूंदों की वर्षा की है, उसी परकार थायस पर, जिसे तूने अपने परेम से रचा है,


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निकल रही थी। बाईं ओर मरुस्थल तक हरेभरे खेतों और वृक्षपुंजों की शोभा आंखों को मुग्ध कर देती थी। पके हुए गेहूं के खेतों पर सूर्य की किरणें चमक रही थीं और भूमि से भीनीभीनी सुगन्ध के झोके आते थे। यह परकृतिशोभा देखकर पापनाशी ने घुटनों पर गिरकर ईश्वर की वन्दना की-'भगवान्, मेरी यात्रा समाप्त हुई। तुझे धन्यवाद देता हूं। दयानिधि, जिस परकार तूने इन अंजीर के पौधों पर ओस की बूंदों की वर्षा की है, उसी परकार थायस पर, जिसे तूने अपने परेम से रचा है,


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