अलंकार - Alankar

दूसरा द्वार देख, नहीं तो मैं डंडे से खबर लूंगा।'

पापनाशी ने सरल भाव से कहा-'मैं कुछ भिक्षा मांगने नहीं आया हूं। मेरी केवल यही इच्छा है कि मुझे अपने स्वामी निसियास के पास ले चलो।'

गुलाम ने और भी बिगड़कर जवाब दिया-'मेरा स्वामी तुमजैसे कुत्तों से मुलाकात नहीं करता !'

पापनाशी-'पुत्र, जो मैं कहता हूं वह करो, अपने स्वामी से इतना ही कह दो कि मैं उससे मिलना चाहता हूं।'

दरबान ने क्रोध के आवेश में आकर कहा-'चला जा यहां से,


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दूसरा द्वार देख, नहीं तो मैं डंडे से खबर लूंगा।'

पापनाशी ने सरल भाव से कहा-'मैं कुछ भिक्षा मांगने नहीं आया हूं। मेरी केवल यही इच्छा है कि मुझे अपने स्वामी निसियास के पास ले चलो।'

गुलाम ने और भी बिगड़कर जवाब दिया-'मेरा स्वामी तुमजैसे कुत्तों से मुलाकात नहीं करता !'

पापनाशी-'पुत्र, जो मैं कहता हूं वह करो, अपने स्वामी से इतना ही कह दो कि मैं उससे मिलना चाहता हूं।'

दरबान ने क्रोध के आवेश में आकर कहा-'चला जा यहां से,


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