शोक ! यह सब केवल रोगपीड़ित मनुष्यों के स्वप्न हैं !'
उसने तब अपने मेहमान को एक हाथीदांत की कुरसी पर जबरदस्ती बैठाया और खुद भी बैठ गया। पापनाशी ने इन पुस्तकों को देखकर त्यौरियां च़ायीं और बोला-'इन सबको अग्नि की भेंट कर देना चाहिए।'
निसियास बोला-'नहीं पिरय मित्र, यह घोर अनर्थ होगा; क्योंकि रुग्ण पुरुषों को मिटा दें तो संसार शुष्क और नीरस हो जाएेगा और हम सब विचारशैथिल्य के ग़े में जा पड़ेंगे।
पापनाशी ने उसी ध्वनि
शोक ! यह सब केवल रोगपीड़ित मनुष्यों के स्वप्न हैं !'
उसने तब अपने मेहमान को एक हाथीदांत की कुरसी पर जबरदस्ती बैठाया और खुद भी बैठ गया। पापनाशी ने इन पुस्तकों को देखकर त्यौरियां च़ायीं और बोला-'इन सबको अग्नि की भेंट कर देना चाहिए।'
निसियास बोला-'नहीं पिरय मित्र, यह घोर अनर्थ होगा; क्योंकि रुग्ण पुरुषों को मिटा दें तो संसार शुष्क और नीरस हो जाएेगा और हम सब विचारशैथिल्य के ग़े में जा पड़ेंगे।
पापनाशी ने उसी ध्वनि