रंगभूमि - Rangbhumi



जॉन सेवक ने बहुत आग्रह किया, किंतु सूरदास ने रुपये नहीं लिए। तब वह हारकर गाड़ी पर जा बैठे।

मिसेज़ सेवक ने पूछा-क्या बातें हुईं?

जॉन सेवक-है तो भिखारी, पर बड़ा घमंडी है। पाँच रुपये देता था, न लिए।

मिसेज़ सेवक-है कुछ आशा?

जॉन सेवक-जितना आसान समझता था, उतना आसान नहीं है। गाड़ी तेज हो गई।


अध्याय 2

सूरदास लाठी टेकता हुआ धीरे-धीरे घर चला। रास्ते में चलते-चलते सोचने लगा-यह है बड़े आदमियों की स्वार्थपरता! पहले कैसे हेकड़ी दिखाते थे,


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जॉन सेवक ने बहुत आग्रह किया, किंतु सूरदास ने रुपये नहीं लिए। तब वह हारकर गाड़ी पर जा बैठे।

मिसेज़ सेवक ने पूछा-क्या बातें हुईं?

जॉन सेवक-है तो भिखारी, पर बड़ा घमंडी है। पाँच रुपये देता था, न लिए।

मिसेज़ सेवक-है कुछ आशा?

जॉन सेवक-जितना आसान समझता था, उतना आसान नहीं है। गाड़ी तेज हो गई।


अध्याय 2

सूरदास लाठी टेकता हुआ धीरे-धीरे घर चला। रास्ते में चलते-चलते सोचने लगा-यह है बड़े आदमियों की स्वार्थपरता! पहले कैसे हेकड़ी दिखाते थे,


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