सकती हैं। यहाँ तक कि वह 'षड़रस युक्त अवलेह तैयार हुआ। उसने उसे उतारकर नीचे रखा। तब तवा चढ़ाया और हाथों से रोटियाँ बनाकर सेंकने लगा। कितना ठीक अंदाज था। रोटियाँ सब समान थीं-न छोटी, न बड़ी; न सेवड़ी, न जली हुई। तवे से उतार-उतारकर रोटियों को चूल्हे में खिलाता था, और जमीन पर रखता जाता था। जब रोटियाँ बन गईं तो उसने द्वार पर खड़े होकर जोर से पुकारा-'मिट्ठू, आओ बेटा, खाना तैयार है।' किंतु जब मिट्ठू न आया, तो उसने फिर द्वार पर टट्टी लगाई,
सकती हैं। यहाँ तक कि वह 'षड़रस युक्त अवलेह तैयार हुआ। उसने उसे उतारकर नीचे रखा। तब तवा चढ़ाया और हाथों से रोटियाँ बनाकर सेंकने लगा। कितना ठीक अंदाज था। रोटियाँ सब समान थीं-न छोटी, न बड़ी; न सेवड़ी, न जली हुई। तवे से उतार-उतारकर रोटियों को चूल्हे में खिलाता था, और जमीन पर रखता जाता था। जब रोटियाँ बन गईं तो उसने द्वार पर खड़े होकर जोर से पुकारा-'मिट्ठू, आओ बेटा, खाना तैयार है।' किंतु जब मिट्ठू न आया, तो उसने फिर द्वार पर टट्टी लगाई,