छत्रपति शिवाजी - Chhatrapati Shivaji

आप को किसी बादशाह के अधीन न समझता था। इसीलिए वह किसी से नहीं दबता था। जब उसको यह समाचार मिला कि मुल्ला अहमद ( कल्याण का अध्यक्ष) ने एक बहुत बड़ा खजाना बिहार की ओर भेजा है त बवह 200 सवार लेकर चल पड़ा और उसे लूट लिया। जिस समय इस लॅअ की ख़बर बीजापुर पहंुची उसी समय यह ख़बर भी मिली कि शिवाजी ने निम्नलिखित किलों पर कब्जा कर लिया। कंगोरी-टोगटकोन-भोरप-कादरी लोहगढ़ और राममोची। इनके अतिरिक्त शिवाजी के आदमियों ने ताला, गोशाला और ’राइरी’


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आप को किसी बादशाह के अधीन न समझता था। इसीलिए वह किसी से नहीं दबता था। जब उसको यह समाचार मिला कि मुल्ला अहमद ( कल्याण का अध्यक्ष) ने एक बहुत बड़ा खजाना बिहार की ओर भेजा है त बवह 200 सवार लेकर चल पड़ा और उसे लूट लिया। जिस समय इस लॅअ की ख़बर बीजापुर पहंुची उसी समय यह ख़बर भी मिली कि शिवाजी ने निम्नलिखित किलों पर कब्जा कर लिया। कंगोरी-टोगटकोन-भोरप-कादरी लोहगढ़ और राममोची। इनके अतिरिक्त शिवाजी के आदमियों ने ताला, गोशाला और ’राइरी’


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