के इतिहासकार भली प्रकार जानते हैं। निदान 1657 ई. में औरंगजेब आगरा के सिहंासन पर विराजमान हो गया। शिवाजी भी औरंगजेब को खूब जानते थे। उन्होंने शिवाजी से सन्धि कर लेने की आज्ञा दे दी और कहा कि जो इलाके शिवाजी ने बीजापुर की रियासत से छीने हैं वह उन्हीं के पास रहेंगे और साथ ही यह भी हुक्म दे दिया कि ’दावल’ और समुद्र किनारे के अन्य मुकाम भी शिवाजी ले लें। यों तो बीजापुर के राज्य को शक्तिहीन करने की यह चाल थी परन्तु वास्तव में
के इतिहासकार भली प्रकार जानते हैं। निदान 1657 ई. में औरंगजेब आगरा के सिहंासन पर विराजमान हो गया। शिवाजी भी औरंगजेब को खूब जानते थे। उन्होंने शिवाजी से सन्धि कर लेने की आज्ञा दे दी और कहा कि जो इलाके शिवाजी ने बीजापुर की रियासत से छीने हैं वह उन्हीं के पास रहेंगे और साथ ही यह भी हुक्म दे दिया कि ’दावल’ और समुद्र किनारे के अन्य मुकाम भी शिवाजी ले लें। यों तो बीजापुर के राज्य को शक्तिहीन करने की यह चाल थी परन्तु वास्तव में