तथा देवताओं के अनादर से अत्यन्त दुःख होता है। ईश्वर ने उसमें बदला लेने की शक्ति कूट-कूट कर भर दी है तो फिर हम किस प्रकार से यह निश्चय कर लें कि अफ़ज़ल खां एक साधारण मनुष्य था । जो इन घटनाओं के होते हूए भी बिना किसी प्रकार की दुष्ट भावना के अकेले ही एक प्रसिद्व नरशेर की कन्दरा में जा घुसा। यदि हम विचारार्थ यह भी मान लें कि ऐसी घटना हुई और शिवाजी ने धोखे से अफ़ज़ल खा को कत्ल किया तो भी कुछ आश्चर्य की बात नहीं, क्योंकि उस समय
तथा देवताओं के अनादर से अत्यन्त दुःख होता है। ईश्वर ने उसमें बदला लेने की शक्ति कूट-कूट कर भर दी है तो फिर हम किस प्रकार से यह निश्चय कर लें कि अफ़ज़ल खां एक साधारण मनुष्य था । जो इन घटनाओं के होते हूए भी बिना किसी प्रकार की दुष्ट भावना के अकेले ही एक प्रसिद्व नरशेर की कन्दरा में जा घुसा। यदि हम विचारार्थ यह भी मान लें कि ऐसी घटना हुई और शिवाजी ने धोखे से अफ़ज़ल खा को कत्ल किया तो भी कुछ आश्चर्य की बात नहीं, क्योंकि उस समय