जिसकी ओट में बस्ती अद्श्य हो जाती है। इसके पास पूर्णधर का किला ठीक उस स्थान पर है जहां से पहाड़ी सिलसिले का रूख दक्षिण की ओर घूम जात है । शिवाजी ने प्रत्येक अवस्था को दृष्टिगोचर करके इन दोनों किलों को बनवाया था और जिस समय जयसिंह ने सुलह की थी उस समय दोनों किले अभी मुसलमानों ही के हाथ में थे और मुसलमानों की ओर से यहां राजपूत सेना नियत की गई थी इस युद्व में ’तानाजी’ ने जो वीरता एवं साहस अपने बहादुर सिपाहियों के साथ दिखायी
जिसकी ओट में बस्ती अद्श्य हो जाती है। इसके पास पूर्णधर का किला ठीक उस स्थान पर है जहां से पहाड़ी सिलसिले का रूख दक्षिण की ओर घूम जात है । शिवाजी ने प्रत्येक अवस्था को दृष्टिगोचर करके इन दोनों किलों को बनवाया था और जिस समय जयसिंह ने सुलह की थी उस समय दोनों किले अभी मुसलमानों ही के हाथ में थे और मुसलमानों की ओर से यहां राजपूत सेना नियत की गई थी इस युद्व में ’तानाजी’ ने जो वीरता एवं साहस अपने बहादुर सिपाहियों के साथ दिखायी