के खोये हुए गौरव को दुबारा लाकर अपने उन्नत ललाट पर क्यों न राजतिलक लगवाये? तेरी जैसी गोद हो तो शिवाजी जैसा पुत्र केहरी जैसी बेटे ने धर्म की रक्षा की, जाति की रक्षा की, तेरे लिए और अपने लिए यश की धारा बहा दी। हिन्दू इतिहासवेत्ता लिखते हैं कि शिवाजी भवानी का
98 छत्रपति शिवाजी
पूजक था-और श्रीमती भवानीदेवी ने उसकी पूजा से प्रसन्ना हो उसको वरदान दिया था। सच मानिये तो जीजाबाई ही शिवाजी के लिए जीती जागती भवानीदेवी थीं वे
के खोये हुए गौरव को दुबारा लाकर अपने उन्नत ललाट पर क्यों न राजतिलक लगवाये? तेरी जैसी गोद हो तो शिवाजी जैसा पुत्र केहरी जैसी बेटे ने धर्म की रक्षा की, जाति की रक्षा की, तेरे लिए और अपने लिए यश की धारा बहा दी। हिन्दू इतिहासवेत्ता लिखते हैं कि शिवाजी भवानी का
98 छत्रपति शिवाजी
पूजक था-और श्रीमती भवानीदेवी ने उसकी पूजा से प्रसन्ना हो उसको वरदान दिया था। सच मानिये तो जीजाबाई ही शिवाजी के लिए जीती जागती भवानीदेवी थीं वे