1680 ई. का वर्ष प्रारम्भ हो चुका है। शिवाजी बीजापुर में अपने दरबार का प्रबन्ध करने में लगे हुए हैं। सम्पूर्णविजित भूमि, अपने पिता की जागीर तथा तत्जौर प्रान्त गोपाल और विहारी के इलाके के अधीन हैं। बीजापुर राज्य शिवाजी का ही समझा जायेगा। शिवाजी इस तमाम विजयोल्लास के आनन्द में मस्त हैं। उन्हें इस बात का पता नहीं कि उनकी अन्तिम घड़ी समीप है। उनकी आत्मा अपना कार्य कर चुकी और उसको इस शरीर के त्यागने की इच्छा है। शिवाजी अपने
1680 ई. का वर्ष प्रारम्भ हो चुका है। शिवाजी बीजापुर में अपने दरबार का प्रबन्ध करने में लगे हुए हैं। सम्पूर्णविजित भूमि, अपने पिता की जागीर तथा तत्जौर प्रान्त गोपाल और विहारी के इलाके के अधीन हैं। बीजापुर राज्य शिवाजी का ही समझा जायेगा। शिवाजी इस तमाम विजयोल्लास के आनन्द में मस्त हैं। उन्हें इस बात का पता नहीं कि उनकी अन्तिम घड़ी समीप है। उनकी आत्मा अपना कार्य कर चुकी और उसको इस शरीर के त्यागने की इच्छा है। शिवाजी अपने