दूर कहीं लालटेन जल रही थी। उसके प्रकाश में थोड़ा सा दिख रहा था। उसी उजाले में मैंने अत्यंत ममता से उस पत्र को पढ़ लिया। उसमें दुःख तथा तेजोभंग का एक शब्द भी नहीं था। इसके विपरीत एक धैर्यशाली संदेश भेजा गया था कि अंगीकृत व्रत की पूर्ति के लिए इससे भी अधिक कठोर तपस्या क्यों न करनी पडे़, चिंता नहीं। मैंने ठान लिया कि इस पत्र का उत्तर भेजूं। अंदमान में एक वर्ष में एक पत्र भेजने की अनुमति दी जाती है, परंतु मैंने सुना था कभी कभी ऐसी सहूलियत भी नहीं मिलती। अतः हो सकता है,
दूर कहीं लालटेन जल रही थी। उसके प्रकाश में थोड़ा सा दिख रहा था। उसी उजाले में मैंने अत्यंत ममता से उस पत्र को पढ़ लिया। उसमें दुःख तथा तेजोभंग का एक शब्द भी नहीं था। इसके विपरीत एक धैर्यशाली संदेश भेजा गया था कि अंगीकृत व्रत की पूर्ति के लिए इससे भी अधिक कठोर तपस्या क्यों न करनी पडे़, चिंता नहीं। मैंने ठान लिया कि इस पत्र का उत्तर भेजूं। अंदमान में एक वर्ष में एक पत्र भेजने की अनुमति दी जाती है, परंतु मैंने सुना था कभी कभी ऐसी सहूलियत भी नहीं मिलती। अतः हो सकता है,