संस्मरण त्रुटित हैं और भावनाओं का वह इतिहास अस्पश्ट, सूचक तथा हलके-हलके रूप में ही बताना बेहतर होगा। अतः जब तक संपूर्ण तथा सुसंगत कथन प्रसिद्व नहीं होता, पाठक हमारे अंदमान स्थित जीवन के बारे में कुछ भी साधारण धारणा न बनाएं। यद्यापि इन संस्मरणों में सारी बातें कहना संभव नहीं है, फिर भी जो कुछ बताया जाएगा उसे अक्षरशः तथा भावार्थशः यथातथ्य बताने का यत्न अवश्य किया जाएगा। इस ग्रंथ में विचारों, भावनाओं तथा घटनाओं का जो वर्णन आएगा,
संस्मरण त्रुटित हैं और भावनाओं का वह इतिहास अस्पश्ट, सूचक तथा हलके-हलके रूप में ही बताना बेहतर होगा। अतः जब तक संपूर्ण तथा सुसंगत कथन प्रसिद्व नहीं होता, पाठक हमारे अंदमान स्थित जीवन के बारे में कुछ भी साधारण धारणा न बनाएं। यद्यापि इन संस्मरणों में सारी बातें कहना संभव नहीं है, फिर भी जो कुछ बताया जाएगा उसे अक्षरशः तथा भावार्थशः यथातथ्य बताने का यत्न अवश्य किया जाएगा। इस ग्रंथ में विचारों, भावनाओं तथा घटनाओं का जो वर्णन आएगा,