मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

कि मोटर की खूब सैर हो गई और उससे बंदियों में मेरे संबंध में जो सकारण-अकारण आदरभाव था और जिसके लिए सरकारी अधिकारी डटकर प्रयत्नशील थे कि वह आदरभाव न बने, बढ़ता ही चला गया।

स्टेशन पर आते ही मुझे एक स्वतंत्र डिब्बे में ठूंसा गया। मेरे हाथों में जो हथकड़ी थी, उसका दूसरा सिरा एक भीमकाय अंगे्रज अधिकारी के हाथ से जकड़ा हुआ था। मेरे लिए उस बेचारे को हथकड़ी पहननी पड़ी। मेरे पैरों में बेड़ियां तो थी ही, हाथ में हथकड़ी थी। इतना ही नहीं


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कि मोटर की खूब सैर हो गई और उससे बंदियों में मेरे संबंध में जो सकारण-अकारण आदरभाव था और जिसके लिए सरकारी अधिकारी डटकर प्रयत्नशील थे कि वह आदरभाव न बने, बढ़ता ही चला गया।

स्टेशन पर आते ही मुझे एक स्वतंत्र डिब्बे में ठूंसा गया। मेरे हाथों में जो हथकड़ी थी, उसका दूसरा सिरा एक भीमकाय अंगे्रज अधिकारी के हाथ से जकड़ा हुआ था। मेरे लिए उस बेचारे को हथकड़ी पहननी पड़ी। मेरे पैरों में बेड़ियां तो थी ही, हाथ में हथकड़ी थी। इतना ही नहीं


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