काल में हिंदू संस्कृति जिन-जिन नूतन भूखंडों पर अपना आधिपत्य फेलाती जा रही है, उसमें अंदमान द्वीपपुंज की गणना करना अत्यावश्यक है।
यह द्वीप कलकत्ता से लगभग छह सौ मील की दूरी पर है। बीच में छोटे-छोटे द्वीपपुंज, थोड़ा सागर, पुनः द्वीपपुंज -इस क्रम से यह एक द्वीपमाला बंगाल के उपसागर में बिखरी हुई है। उसमें अंदमान सबसे बड़ा द्वीप है। वह तीन भागों में विभाजित है। इनको उत्तर अंदमान, मध्य अंदमान और दक्षिण अदंमान की सज्ञाएं दी
काल में हिंदू संस्कृति जिन-जिन नूतन भूखंडों पर अपना आधिपत्य फेलाती जा रही है, उसमें अंदमान द्वीपपुंज की गणना करना अत्यावश्यक है।
यह द्वीप कलकत्ता से लगभग छह सौ मील की दूरी पर है। बीच में छोटे-छोटे द्वीपपुंज, थोड़ा सागर, पुनः द्वीपपुंज -इस क्रम से यह एक द्वीपमाला बंगाल के उपसागर में बिखरी हुई है। उसमें अंदमान सबसे बड़ा द्वीप है। वह तीन भागों में विभाजित है। इनको उत्तर अंदमान, मध्य अंदमान और दक्षिण अदंमान की सज्ञाएं दी