सुपारी तथा पीपल वृक्ष के पुंज दिखाई दे रहे थे। निकट घाट पर मनुष्यों के झुंड-के-झुंड चहक रहे थे। उसके ऊपर ही ऊंचाई के सिरे पर नारियल के झूमते हुए छत्र के नीचे एक वृत्ताकार प्राचीर के भीतर एक भव्य भवन दिखाई दिया। कितना शांत उसके इर्दगिर्द नारियल, सुपारी तथा केले के वन चंॅवर ठुला रहे थे, छत्र पकड़कर खड़े थे। लगा जैसे यह किसी संपन्न तथा शांतिप्रिय गृहस्थ की कोठी हो अथवा किसी पादरी का आश्रम। हमने पूछा,‘‘वह भवन क्या है?’’ सिपाही ने कहा,
सुपारी तथा पीपल वृक्ष के पुंज दिखाई दे रहे थे। निकट घाट पर मनुष्यों के झुंड-के-झुंड चहक रहे थे। उसके ऊपर ही ऊंचाई के सिरे पर नारियल के झूमते हुए छत्र के नीचे एक वृत्ताकार प्राचीर के भीतर एक भव्य भवन दिखाई दिया। कितना शांत उसके इर्दगिर्द नारियल, सुपारी तथा केले के वन चंॅवर ठुला रहे थे, छत्र पकड़कर खड़े थे। लगा जैसे यह किसी संपन्न तथा शांतिप्रिय गृहस्थ की कोठी हो अथवा किसी पादरी का आश्रम। हमने पूछा,‘‘वह भवन क्या है?’’ सिपाही ने कहा,