उन पर मिथ्या दोषारोपण कर पठान बंदियों ने उन्हें निकाल दिया और पठान बंदियों की अधिकारियों के पदों पर नई भरती होती रही। पठान अधिकारी नित्य पठानों का पक्ष लेते। उनकी यही एकता सत्कर्माें मंे एक आदर्श सिद्व होती। उनके इस मेल के कारण पठान मुसलमानों, सिंधी मुसलमानों, बलूची मुसलमानों के गुटों के बंदी अधिकारी अपनी-अपनी जातियों के बंदियों को यथासंभव हिंदुओं को अधिक-से-अधिक यंत्रणा देने के लिए प्रोत्साहित करने लगे। अतः हम हिंदू
उन पर मिथ्या दोषारोपण कर पठान बंदियों ने उन्हें निकाल दिया और पठान बंदियों की अधिकारियों के पदों पर नई भरती होती रही। पठान अधिकारी नित्य पठानों का पक्ष लेते। उनकी यही एकता सत्कर्माें मंे एक आदर्श सिद्व होती। उनके इस मेल के कारण पठान मुसलमानों, सिंधी मुसलमानों, बलूची मुसलमानों के गुटों के बंदी अधिकारी अपनी-अपनी जातियों के बंदियों को यथासंभव हिंदुओं को अधिक-से-अधिक यंत्रणा देने के लिए प्रोत्साहित करने लगे। अतः हम हिंदू