का शिकार बनी प्रत्येक अंगे्रज महिला के वध के पूर्व ही केवल विद्रोहियों की नाक में सुतली पिरोने के लिए भारतीय लोगों की दस-दस स्त्रियां अंगे्रजी-सेना के अग्निकांड का शिकार बन गई। उस अंग्रेज सेनानी के इंग्लैंड में पुतले खड़े किए गए। नील अपनी दैनिकी में कहती है, ‘‘अंग्रेज राष्ट्र के कल्याणार्थ इस निर्दयता का अवलंबन करना मेरा कर्तव्य था।’ सन् 1857 के क्रांतिकारियों को भी क्या वही समर्थन उपयुक्त नहीं होगा? यदि दोषी हैं तो हम दोनों,
का शिकार बनी प्रत्येक अंगे्रज महिला के वध के पूर्व ही केवल विद्रोहियों की नाक में सुतली पिरोने के लिए भारतीय लोगों की दस-दस स्त्रियां अंगे्रजी-सेना के अग्निकांड का शिकार बन गई। उस अंग्रेज सेनानी के इंग्लैंड में पुतले खड़े किए गए। नील अपनी दैनिकी में कहती है, ‘‘अंग्रेज राष्ट्र के कल्याणार्थ इस निर्दयता का अवलंबन करना मेरा कर्तव्य था।’ सन् 1857 के क्रांतिकारियों को भी क्या वही समर्थन उपयुक्त नहीं होगा? यदि दोषी हैं तो हम दोनों,