तो फिर अचानक टूटे निराशओं के इस पहाड़ के नीचे हमारा जिस पीढ़ी को प्रयासों के मृत सरोवर के विशाक्त प्रदेश से मार्ग का अतिक्रमण करना हो, उसे प्रतिकूलता रूपी लोहे के चने चबाकर उन्हें हजम करने का अभ्यास करना ही होगा।
दारूण आघात
परंतु जो प्रतिकूल है वही घटित होगा, यह मानकर चलने की थोड़ी आदत और श्शक्तिवाले मेरे मन पर एकाएक इतना भयंकर आघात हुुआ कि मूच्र्छा आ जाए। मैं जब लंदन में पकड़ा गया था1 तभी मैंने समझ लिया था कि अंदमान
तो फिर अचानक टूटे निराशओं के इस पहाड़ के नीचे हमारा जिस पीढ़ी को प्रयासों के मृत सरोवर के विशाक्त प्रदेश से मार्ग का अतिक्रमण करना हो, उसे प्रतिकूलता रूपी लोहे के चने चबाकर उन्हें हजम करने का अभ्यास करना ही होगा।
दारूण आघात
परंतु जो प्रतिकूल है वही घटित होगा, यह मानकर चलने की थोड़ी आदत और श्शक्तिवाले मेरे मन पर एकाएक इतना भयंकर आघात हुुआ कि मूच्र्छा आ जाए। मैं जब लंदन में पकड़ा गया था1 तभी मैंने समझ लिया था कि अंदमान