चुके थे। इन निर्लज्ज लोगों को मेरे आगमन से आनंद प्राप्त हुआ। अधिकारियों को कुल मिलाकर मेरी सारी गतिविधियांे को बताने की उत्कट भयप्रद कामना। उनमें उत्पन्न हुई और सत्य नहीं भी तो मेरे विरूद्व मिथ्या बातें भी नमक-मिर्च लगाकर उनकी इच्छापूर्ति करते हुए किसी प्रकार अपने पूर्व अपराध का उन्हें विस्मरण कराकर स्वयं छुटकारा पाने का प्रयास करना ही इन राजबंदियों में से दो-तीन बंगाली बंदीवानों का अभीष्ट था। इन दो उलझनों के चंगुल में
चुके थे। इन निर्लज्ज लोगों को मेरे आगमन से आनंद प्राप्त हुआ। अधिकारियों को कुल मिलाकर मेरी सारी गतिविधियांे को बताने की उत्कट भयप्रद कामना। उनमें उत्पन्न हुई और सत्य नहीं भी तो मेरे विरूद्व मिथ्या बातें भी नमक-मिर्च लगाकर उनकी इच्छापूर्ति करते हुए किसी प्रकार अपने पूर्व अपराध का उन्हें विस्मरण कराकर स्वयं छुटकारा पाने का प्रयास करना ही इन राजबंदियों में से दो-तीन बंगाली बंदीवानों का अभीष्ट था। इन दो उलझनों के चंगुल में