के श्री गणेशपंत सावरकर और श्री वामनराव जोशी थे। उनके आगे-पीछे ही बंगाल कीएक राजनीतिक डकैती के संबंध में पांच-छह लोग आए थे। इन सभी राजबंदिों में तीन बंगलियों और दो महाराष्ट्रियों को आजीवन कालेपानी का दंड प्राप्त हुआ था। शेष बंगाली लोग दस से तीस वर्षों तक के लिए दंड प्राप्त थे। मैं जब वहां गया था तब इन लोगों के अतिरिक्त इलाहाबाद के ‘स्वराज्य’ पत्र के चार संपादक भी वहां आए थे, जिन्हें सात से दस वर्षों का दंड हुआ था। परंतु उन पर राजद्रोह का आरोप लगाया गया था,
के श्री गणेशपंत सावरकर और श्री वामनराव जोशी थे। उनके आगे-पीछे ही बंगाल कीएक राजनीतिक डकैती के संबंध में पांच-छह लोग आए थे। इन सभी राजबंदिों में तीन बंगलियों और दो महाराष्ट्रियों को आजीवन कालेपानी का दंड प्राप्त हुआ था। शेष बंगाली लोग दस से तीस वर्षों तक के लिए दंड प्राप्त थे। मैं जब वहां गया था तब इन लोगों के अतिरिक्त इलाहाबाद के ‘स्वराज्य’ पत्र के चार संपादक भी वहां आए थे, जिन्हें सात से दस वर्षों का दंड हुआ था। परंतु उन पर राजद्रोह का आरोप लगाया गया था,